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Sirjan | रचना संसार

 

खूंटे में मोर दाल है, का खाउं-का पीउं, का ले के परदेस जाउं...

आप इस लोक कथा को एक बार फिर पढं़े, अपने बचपन के दिन याद करें और नयी पीढ़ी को भी इसके माध्यम से समझाने की कोशिश करंे कि कैसे बड़ी से बड़ी चुनौतियांे का सामना हिम्मत और अक्ल से किया जाए तो रास्ते निकल आते हैं. और एक खास बात यह कि सब उसी की मदद करते हैं, जो अपनी मदद करना स्वयं जानता है-

भोजपुरी लोकगीत में जीवन के मर्म

लोकगीत की व्यापकता मानव के जन्म से लेकर मृत्यु तक है। ये सबकी संपति मानी जाती है। आज का बच्चा कल बड़ा होने पर वह अपने बच्चों को यह सुनता है। मृत्यु जीवन का कटु सत्य है, जिसे भोजपुरी मानस (और भी क्षेत्रों में थोड़ा बदलाव के साथ गाया जाता है) में बच्चों को खेल-खेल मंे सिखाया जाता है।

एहो देखीं जा

 

सुंदर सुभूमि भैया भारत के देसवा से, posted on 06 Mar 2011 by Nirala
कुछ महेंद्र मिसिर के आउर कुछ ऐने ओने से जुगाड़ल गीत, posted on 06 Mar 2011 by Nirala

लोग मुझसे उम्मीद करते हैं, मैं भी बहक गयी तो..., posted on 06 Mar 2011 by Nirala

 

बिसेस: भिखारी ठाकुर के

भोजपुरी सिनेमा के 50 बरिस

चिठी-पतरी, आख्यान-व्याख्यान

नदिया के पार के 25 वर्ष

दामुल के 25 साल

25 Yrs of Damul

एगो ऐतिहासिक क्षण

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