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एहो देखीं जा

सुहाना सफर
50 सालों के सफर में भोजपुरी में कई ऐसी फिल्में बनीं, जिसे देखने दूर-दराज इलाके से लोग थियेटर एक-दो नहीं कई-कई बार पहुंचते थे. पहली फिल्म ‘ गंगा मईया तोहे पियरी चढ़ईबो’ का तो अपना जादू था ही, जिसमें शैलेंद्र के सदाबहार गीत, चित्रगुप्त के मनभावन संगीत के साथ कुंदन कुमार के निर्देशन में असीम कुमार और कुमकुम ने शानदार अभिनय किया था. 1963 में ‘बिदेसिया’ और ‘ लागे नाही छुटे रामा’ ने भी भोजपुरीभाषियों को बार-बार सिनेमाघरों तक पहुंचाया. बिदेसिया की कहानी राममूर्ति चतुर्वेदी ने लिखी थी. इसमंे सुजीत कुमार के अभिनय के संग बेला बोस, नाज और हेलेन के नृत्य का जादू था. रामायण तिवारी की फिल्म ‘लागे नाही छुटे रामा’ ने भी बेहतर कारोबार किया. इन तीनों फिल्मों के बाद दर्शकों को आकर्षित करने का रिकार्ड 20 साल बाद 1983 में ‘ गंगा किनारे मोरा गांव’ से ही टूट सका. इस बीच गोरकी पतरकी रे... गीत के साथ 1979 में आयी ‘ बलम परदेसिया’ ने भी खूब नाम और पैसा कमाया. 1977 में भोजपुरी की पहली रंगीन फिल्म ‘ दंगल’ आयी, जिसमें आरा हिले-छपरा हिले गीत का जादू चला. 1981 में ‘ धरती मईया’ फिल्म का प्रदर्शन हुआ, जिसे भोजपुरी सिनेमा का मदर इंडिया कहा गया. 1984 में ‘भईया दूज’ नाम से बनी फिल्म ने लोगों के मानस पर असर छोड़ा. फिर अगले साल ‘पिया के गांव’ और ‘बिहारी बाबू’ फिल्म चरचे में रही. बिहारी बाबू में ब्रजकिशोर दुबे के लिखे गीत काफी मशहूर हुए और कहा जाता है कि इसी फिल्म के बाद श़त्रुघ्न सिन्हा बिहारी बाबू के नाम से मशहूर हुए. 1986 में ‘दुल्हा गंगा पार के’ का जादू चला तो 1988 में ‘दगाबाज बलमा’ बनाकर आरती भट्टाचार्य भोजपुरी सिनेमा की पहली महिला निर्देशक बनीं. 1989 में ‘ माई’ नाम से आयी फिल्म ने दर्शकों से भावनात्मक रिश्ता जोड़ा. ये सब स्वर्णीम दौर की फिल्में हैं, जिसे अब भी याद किया जाता है. नये दौर की शुरुआत 2004 में ‘ ससुरा बड़ा पईसावाला’ से हुई, जिसमें गायक मनोज तिवारी ने अभिनय किया. अगले साल मनोज तिवारी ने ‘दरोगा बाबू आई लव यू’ में काम किया, उसने भी खूब कारोबार किया. 2005 में रविकिशन ‘कब होई गवना हमार’ और ‘पंडित जी बताई न बियाह कब होई’ में अभिनय कर बड़े स्टार बन गये. मनोज की सफलता के बाद पूर्वांचल के मशहूर गायक दिनेश लाल यादव निरहुआ भी ‘निरहुआ रिक्शावाला’ फिल्म में काम कर छा गये. उसके बाद का सफर तो अभी जारी है.
-निराला
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Posted on 06 Mar 2011 by Nirala

 

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