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Lyrics & Poetry | गीत-गवनइ

 

कुछ महेंद्र मिसिर के आउर कुछ ऐने ओने से जुगाड़ल गीत

अंगुरी में डंसले बिया नगिनिया हे...

अंगुरी में डंसले बिया नगिनिया हे...
अंगुरी में डंसले बिया नगिनिया हे,
रे ननदी दियरा जराई द
दियरा जराई दे अपना भइया के जगा दे
नसे-नसे उठेला लहरिया हे, रे ननदी दियरा जराई द
एक त हम मुअनी रामा अपना दरद से
दोसरे इ रतिया अन्हरिया रे, हे ननदी दियरा जराई द
पटना सहरिया से बइदा बुलाई द-2
पोरे-पोरे उठेला दरदिया रे, हे ननदी दियरा जराई द
कहत महेंदर ननदी भइया के बोलाई द
उनही से उतरी इ लहरिया रे, हे ननदी दियरा जराई द
अंगुरी में डंसले बिया नगिनिया हे, रे ननदी दियरा...
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आधी आधी रतिया के पिहिके पपीहरा

आधी आधी रतिया के पिहिके पपीहरा
से बैरिनिया भइले ना
मोरा अंखिया के निनिया
से बैरिनिया भइले ना
पिया कलकतिया घरे भेजे नाही पतिया
से सवतिया भइले ना
कुहु-कुहु कुहके कोयलिया
से सवतिया भइले ना
बभना बेदरदी मोरा जनमे के बइरी
से लगनिया जोडले ना
निरमोहिया बेदरदी से सनेहिया जोडले ना
द्विज महेंदर इहो गावेले पुरूबिया
से सवतिया कइले ना
बिरहिनिया के छतिया से अगिया धइले ना
आधी आधी रतिया के पिहिके पपीहरा
से बैरिनिया भइले ना
मोरा अंखिया के निनिया
से बैरिनिया भइले ना...
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सासु मोरा मारे रामा बांस के छिउंकिया

सासु मोरा मारे रामा बांस के छिउंकिया
ए ननदिया मोरी रे सुसुकत पनिया के जाय.
हाथवा में लिहली ननदो सोने के घरिलवा
ए ननदिया मोरी रे चलि भइली जमुना किनार
ग्ंागा रे जमुनवा के चिकनी डगरिया
ए ननदिया मोरी रे पउआं धरत बिछलाय
छोटे-मोटे पातर पियवा हंस के ना बोले
ए ननदिया मोरी रे से रहे पियवा कहीं चली जाय
छोटे मोटे जामुन गछिया फरेना फुलाय
ए ननदिया मोरी रे से हो गछिया सूखिया ना जाय
गावत महेंदर मिसिर इहो रे पुरूबिया
ए ननदिया मोरी रे पिया बिनु रहली ना जाय...
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पिया मोरा गइले रामा पुरूबी बनिजिया से देके गइले ना

पिया मोरा गइले रामा पुरूबी बनिजिया से देके गइले ना
एगो सुगना खेलवना राम से देके गइले ना
तेाहरा के देबो सुगना दूध भात खोरवा स ेले के सुतबो ना
दुनो जोबना के बीचे राम से लेके सुतबो ना
धरी रात बितलें, पहरी रात बितलें से काटे लगलें ना
मेरा चोलिया के बंदवा राम से काटे लगले ना
एक मन करे सुगना धई के पटकिती से दोसर मनवा न
हमरा पियवा के खेलवना से दोसर मनवा न
उडल उडल सुगना गइले पुरूबवा से जाके बइठे ना
मोरा पिया के पगरिया से जाके बइठे ना
पगरी उतारी पिया जांघे बइठवले से पूछे लगले ना
अपना घरवा के बतिया से पूछे लगले ना
कहत महेंदर सुनी सुगना के बतिया पिया सुसुके लगले ना
सुनि के धनिया के हलिया के पियवा सुसुके लगले ना...
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पातर पातर गोरिया के पतरी कमरिया

पातर पातर गोरिया के पतरी कमरिया
मेार संवरिया रे, पतरी डगरिया धइले जाय.
पातर लप-लप गोरी पतरी अंगुरिया
मोर संवरिया रे लचकत पनिया के जाय
सरिया के आरी-आरी गोटवा के जरिया
मेार संवरिया रे मटकत रहिया के जाय
बिंदिया लिलरिया जइसे चमकत बिजुरिया
मोर संवरिया रे कलिया पर भंवरा लोभाय
गावत महेंदर मिसिर इहो रे पुरूबिया
मोर संवरिया रे देखले में जिया न अघाय...
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होते पराते चलि जइहो मोरे राजा

होते पराते चलि जइहो मोरे राजा
तनिक भर बोल बतिया ल मोरे राजा
रचि-रचि जेवना हम अपने बनाइब
बेनिया डोला के दुलार से जेवाइब
तलफत जवनिया के तनिका जोगा के
सबेरे के गाडी स ेचल जइह राजा
पाकल पाकल पनवां के बीडा लगाइब
करब ना टोना अपना हाथे खियाइब
बिरहा के रतिया भेयावन बुझाला
अरजी पर हमरा छोहा जइह राजा.
जइब त जिनगी अन्हार होई जाई
अइसन पियार कतहीं ना भेंटाई
राते दिन कुन्हुरेली नेहिया के दीयरी
नेहिया के बाती उसुका जइह राजा
दिन रात सइयां तोहर टहल बजाइब
कहब से करब ना तनिको लजाइब
छछनेला मनवा के तातल जवानी
कहत महेंदर सेरा जइह राजा
तनिक भर बोल बतिया ल मोरे राजा...
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सोहर

छापक पेड़ छिउलिया त पतवन धन बन हो
ताहि तर ठाढ़ हरिनवा त हरिनी से पूछेले हो
चरतहीं चरत हरिनवा त हरिनी से पूछेले हो
हरिनी! की तोर चरहा झुरान कि पानी बिनु मुरझेलू हो
नाहीं मोर चरहा झुरान ना पानी बिनु मुरझींले हो
हरिना आजु राजा के छठिहार तोहे मारि डरिहें हो
मचियहीं बइठली कोसिला रानी, हरिनी अरज करे हो
रानी! मसुआ तो सींझेला रसोइया खलरिया हमें दिहितू न हो
पेड़वा से टांगबी खलरिया त मनवा समुझाइबि हो
रानी हिरि-फिरि देखबि खलरिया जनुक हरिना जिअतहिं हो
जाहू! हरिनी घर अपना खलरिया ना देइबि हो
हरिनी खलरी के खंझड़ी मढ़ाइबि राम मोरा खेलिहें नू हो
जब-जब बाजेला खंजड़िया सबद सुनि अहंकेली हो
हरिनी ठाढ़ि ढेकुलिया के नीचे हरिन बिसूरेली हो
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कजरी

हरि-हरि कृश्ण बनेलें मनिहारिन पहिरेलें सारी ए हरी
सिर लेलें डगरिया भारी, चुड़ियन के छवि न्यारी, रामा
अरे रामा गलियन फिरत पुकारि, के पहिरनवारी ए रामा
सखि टेर-टेर गोहराईं, एहर आव ए मनिहारिन, रामा
अरे रामा अइसन चुड़िया पिन्हाव, पिया के लगे प्यारी ए हरी
हरि बंहिया पकड़ि पहिराई, तब धीरे-धीरे मुसुकाई, रामा
अरे रामा चिहुंकि उठे राधा प्यारी, हंसत ब्रजनारी ए हरि...
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निरगुण
मोरा पिछुअरिया, मोरा पिछुअरिया
मोरा पिछुअरिया ए उधो, चनन के रे गछिया
ताहि तरह बिछवलों, ताहि तरह बिछवलों
ताहि तरह बिछवलों के ए उधो, लाली रे पलंगिया
ताहि पर सुतलों, ताहि पर सुतलों
ताहि पर सुतलों ए उधो, पियवा संग रे सेजिया
जब हम जगलीं, जब हम जगलीं
जब हम जगलीं ए उधो, पियवा गइले रे चोरिया
जाहु हम जनतीं, जाहु हम जनतीं
जाहु हम जनतीं ए उधो, पियवा जइहें रे चोरिया
कसि बान्ह बन्हतीं, कसी बान्ह बन्हतीं
कसी बान्ह बन्हतीं ए उधो, रेसम के रे डोरिया
रेसम के डोरिया, रेसम के डोरिया
रेसम के डोरिया ए उधो टूटी-फाटी रे जइहें
प्रेम के बन्हलका, प्रेम के बन्हलका
प्रेम के बन्हलका ए उधो, जनम रे सनेहिया
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सुमिरन-माई गीत

निमिया के डाढ़ मइया, लावेली हिंडोलवा कि झूली-झूमी
मइया मोरी गावेली गीत कि झूली-झूमी
झुलत-झुलत मइया के लगली पियसिया, कि चली भइली
मलहोरिया अवास कि चलि भइली
सूतल बाड़ू कि जागल ए मालिन, बून एक
मोहि के पनिया पियाव कि बून एक
कइसे में पनिया पियाईं ए सीतली मइया, मोरा गोदे
दीहल बलका तोहार कि मोरा गोदे
बलका सुताव मालिन, सोने के खटोलवा कि बून एक
मोहि के पनिया पियाव कि बून एक
एक हाथे लेली मालिन झंझरा तमरूआ कि दूजे हाथे
सिंघासन पाट कि दूजे हाथे
पनिया त पियलू मइया, पाटे चढ़ि बइठ कि बोल मइया
ई नगरिया कुलसात कि बोल मइया
सगरी नगरिया मालिन, खेम कुसलतिया कि भल मालिन
अब चाहींला तहार कि भल मालिन
जइसन ए मालिन, हमें जुड़ववलू कि ओइसन
तोहर धियवा जुड़ास कि ओइसन
धियवा त बाड़ी मइया, आपन ससुररिया, पतोहिया तोर
बाड़ी आपन नइहरवा पतोहिया तोर
धियवा जुड़ास मालिन, आपन ससुररिया, पतोहिया तोर
अपना नइहर जुड़ास, पतोहिया तोर...
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झूमर

अंगनइया में कुंइया खना द, बलम तोरे पइयां परूं मैं जी
अंगनइया में तबे सोभ राजा, जब पक्का जगतिया बना द
बलमु तोरे पइयां परूं मैं जी
पक्का जगतिया तबे सोभे राजा, जब सोने घरिलवा मंगा द
बलमु तोरे पइयां परूं मैं जी
सोने घरिलवा तबे सोभे राजा, जब रेसम रसरिया मंगा द
बलमु तोरे पइयां परूं मैं जी
रेसम रसरिया तबे सोभे राजा, जब पांचहीं सखिया बोला द
बलमु तोरे पइयां परूं मैं जी
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कजली

रूनझुन खोल न हो केवड़िया, हम बिदेसवा जइबो ना
जो मोरे संइयां तुहुं जइब हो बिदेसवा, तू बिदेसवा जइब ना
हमरा बाबा के बोला द, हम नइहरवा जइबो ना
जो मोरी धनिया तुहुं जइबू नइहरवा, तू नइहरवा जइबु ना
जतना लागल बा रूपइया, ततना देई के जइह ना
जो मोरे संइयां तुहुं लेइब रूपइया, तू रूपइया लेइब ना
जइसन बाबा घरवा रहलीं, तइसन कई के जहइ ना...

एहो देखीं जा

 

खूंटे में मोर दाल है, का खाउं-का पीउं, का ले के परदेस जाउं..., posted on 06 Mar 2011 by Nirala
भोजपुरी लोकगीत में जीवन के मर्म, posted on 06 Mar 2011 by Nirala

 

बिसेस: भिखारी ठाकुर के

भोजपुरी सिनेमा के 50 बरिस

चिठी-पतरी, आख्यान-व्याख्यान

नदिया के पार के 25 वर्ष

दामुल के 25 साल

25 Yrs of Damul

एगो ऐतिहासिक क्षण

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