SANS

Letters & Speeches | चिठी-पतरी, आख्यान-व्याख्यान

 

ओका-बोका तीन तडोका लउआ लाठी काठी

ये गीत अलग-अलग गीतकारों ने रचे हैं लेकिन इन्हें स्वर देकर मुकाम दिया भरत सिंह भारती ने. वही भरत सिंह भारती, जो आकाषवाणी के जरिये बिहारवासियों के दिलों में राज करते थे. अपने समूह के साथ खुद तबला बजाते हुए जब पुरबिया तान साधते थे तो हजारों की भींड़ घंटों बेसुध होकर जमी रहती थी. भरत सिंह भारती के गाये कुछ गीतों को पढ़िये

Read …

एहो देखीं जा

 

खूंटे में मोर दाल है, का खाउं-का पीउं, का ले के परदेस जाउं..., posted on 06 Mar 2011 by Nirala
भोजपुरी लोकगीत में जीवन के मर्म, posted on 06 Mar 2011 by Nirala

 

बिसेस: भिखारी ठाकुर के

भोजपुरी सिनेमा के 50 बरिस

चिठी-पतरी, आख्यान-व्याख्यान

नदिया के पार के 25 वर्ष

दामुल के 25 साल

25 Yrs of Damul

एगो ऐतिहासिक क्षण

Contact Bidesia