SANS

Anam-Badnam | अनाम, गुमनाम, बदनाम

 

दिल दिया, जान दी और दे दी सारी कमाई...

अकथ कहानी प्रेम की
काल निगल गया एक प्रेम कथा को
इतिहास में गुमनाम ही हैं बाबू कुंवर सिंह की सहयोगी और बाद में दूसरी पत्नी बनीं धरमन

बत्तख मियां न होते तो 1917 में ही दुनिया से विदा हो जाते बापू

30 जनवरी को हम शहीद दिवस के रूप में मनाते हैं. उसी रोज नथुराम गोड्से ने गांधी की हत्या कर दी थी. लेकिन गांधी की हत्या उनके शुरुआती दिनों में ही हो जाती, यदि बत्तख मियां न होते. आइये कुछ जानते हैं अपने माटी के गुमनाम नायक बत्तख मियां अंसारी की दास्तां-

गावेला बलेस्सर अजमगढ़ के, जे बाटे मुंहफूंकना रे सजनी....

मैं आजमगढ़ का रहनेवाला सामान्य सा एक बिरहा गायक हूं. अपनी गायकी को लेकर कभी द्वंद्व में नहीं रहता, ना रहना चाहता हूं कि नवरात्रा आये तो जरा माई का भजन गाकर भी खुद को लोकप्रिय कर लूं, सावन का महीना आये तो जरा बम भोले के गीतों पर भी सुर लगा लूं और जब होली आये तो साया-चोली का बाजूबंद खोलने में लग जाउं. मैं वही गाता हूं, जो सच है. सच यही है कि लोक का मिजाज यथार्थ में जीता है, वह अपने जीवन की सच्चाई को, जीवन की मस्ती को, जीवन की आकांक्षा को लोकगीतों में तलाशता है.

एहो देखीं जा

 

लोग मुझसे उम्मीद करते हैं, मैं भी बहक गयी तो..., posted on 06 Mar 2011 by Nirala

खूंटे में मोर दाल है, का खाउं-का पीउं, का ले के परदेस जाउं..., posted on 06 Mar 2011 by Nirala
भोजपुरी लोकगीत में जीवन के मर्म, posted on 06 Mar 2011 by Nirala

 

बिसेस: भिखारी ठाकुर के

भोजपुरी सिनेमा के 50 बरिस

चिठी-पतरी, आख्यान-व्याख्यान

नदिया के पार के 25 वर्ष

दामुल के 25 साल

25 Yrs of Damul

एगो ऐतिहासिक क्षण

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